Yogi 2.0 Cabinet: जाने पहली बार मंत्री बने विधायकों को बड़े मंत्रालय मिलने की क्या है वजह, देखे पूरी लिस्ट ?

Yogi 2.0 Cabinet:– उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी कोई ना कोई एक्सपेरिमेंट करती ही रहती है। अलग-अलग तरह के एक्सपेरिमेंट चुनाव से पहले खूब देखे गए थे, ऐसे में भला मंत्री मंडल का गठन और उसमें मंत्रालयों का बटवारा कैसे अछूता रह सकता था। लिहाजा चुनाव में अपना लोहा मनवा चुके बीजेपी के चतुर चिंतकों और थिंक tanks नें अपना वैज्ञानिक दिमाग इधर भी खूब चलाया और इसमें बीजेपी का जो नया एक्सपेरिमेंट देखने को मिला उसमें मंत्रालयों का बटवारा सीनियर जूनियर या उम्र वाले फैक्टर को देखकर नहीं किया गया क्योंकि मंत्रालयों के बंटवारे के बाद यूपी कैबिनेट का जो सूरते हाल दिख रहा है।

Yogi 2.0 Cabinet

 

उसमें बड़े मंत्रालयों का जिम्मा राजनीति में 10 को गुजार चुके वरिष्ठ के बजाए नए चेहरों को दिया गया है। यह नए चेहरे भी ऐसे हैं, जो अपने राजनीतिक कैरियर में मंत्री ही पहली बार बनाई गई हैं। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जो खुद 34 अलग-अलग विभागों का जिम्मा संभालने जा रहे हैं, उनकी कैबिनेट में डिप्टी सीएम बनाए गए बृजेश पाठक को स्वास्थ्य मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा गया है। माना जा रहा है कि पार्टी के इस ब्राह्मण चेहरे को महत्वपूर्ण पद और बड़ा मंत्रालय देकर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण समाज के अपनी वोट को और मजबूत करने की कोशिश की है।

पहली बार मंत्री बने चहरों पर गौर करें तो इसमें योगेंद्र उपाध्याय के नाम की खूब चर्चा है, कहा जा रहा है कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को लागू करवाने की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री योगेंद्र उपाध्याय उच्च शिक्षा के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना उद्योगी की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभालेंगे। बात अगर देवी रानी मौर्य की करें उन्हें भी महिला विकास एवं बालक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह एक महिला होने के साथ-साथ जाटव समाज से भी आती है। ऐसे में सियासी पंडितों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में उनके जरिए महिलाओं और प्रदेश के जाटव समाज में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।

योगी आदित्यनाथ के दूसरे शासन में सहकारिता विभाग का जिम्मा भी एक नव युवक मंत्री को ही दिया गया है, सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी पहली बार मंत्री बने जीपीएस राठौर संभालेंगे। कहा जा रहा है कि वह केंद्र में सहकारिता मंत्री अमित शाह के एजेंडे को प्रदेश में लागू करवाएंगे, यूपी में समाज कल्याण और अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग का जिम्मा भी एक ऐसे मंत्री को सौंपा गया है, यह विभाग पूर्व आईपीएस असीम अरुण के पास है उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नजदीकी बताया जाता है। असीम अरुण भी पहली बार ही मंत्री बनाए गए है। उनके लिए कहा जा रहा है कि उनके बीजेपी बीजेपी ने प्रदेश दलित समाज की सहानुभूति अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। Read also- Petrol-Diesel Price: देश में डीजल और पेट्रोल के दाम एक बार फिर आउट आफ कंट्रोल ।

इसी तरह से परिवहन विभाग की जिम्मेदारी पहली बार स्वतंत्र राज्य मंत्री बनाए गए दयाशंकर सिंह को सौंपी गई है। जबकि पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी पहली बार मंत्री बनाए गए जयवीर सिंह को दी गई है, चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए दिनेश प्रताप सिंह को उद्यान एवं कृषि विप्राण भाग और चुनाव से ही पहले सपा से आए विपिन अग्रवाल आपकारी विभाग देकर बीजेपी(BJP) ने कहीं ना कहीं विपक्ष और विपक्ष से जुड़े चेहरे को भी एक संदेश देने की कोशिश की है। इसी तरह से पहली बार मंत्री बनाई गई रजनी तिवारी को उच्च शिक्षा विभाग कुंवर बृजेश सिंह को लोक निर्माण, प्रतिभा शुक्ला को महिला कल्याण पहली बार मंत्री बनाए गए राकेश राठौर को नगर विकास सुरेश राही क़ो कारागार और सोमेंद्र तोमर को ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सभी लोग पहली बार ही मंत्री बनाए गए हैं।

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